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skin care tips in hindi – HEALTH EDUCATION part – 2 ,(त्वचा और उसकी संरचना) 2020

त्वचा और उसकी संरचना  (skin and it’s structure)

 

  • skin care tips जब बच्चे जन्म लेते है तो उनकी त्वचा नर्म,नाजुक,गुलाबी रंगत के होते है बिना दाग-धब्बे की होती है। मगर जैसे जैसे उम्र बढ़ती चले जाती है उसके साथ साथ ही उसकी रंगत में भी परिवर्तन आना शुरू हो जाता है। किशोर अवस्था में भरपूर निखार आता है। आकर्षण के केन्द्रो में यह त्वचा बहुत योगदान देती है।  मगर उम्र बढ़ने के साथ हमारी त्वचा पर सख्त, बदरंग,रूखी व झुर्रियों दार बन जाती है।
  • त्वचा का सही प्रकार से देखभाल न करने का परिणाम त्वचा की कई समस्याओं के रूप में सामने आती है। जैसे – झुर्रिया,झाइयां,कील-मुहासे,कई प्रकार के दाग -धब्बे और भी बहुत कुछ समस्या आती है। जिसकी वजह है त्वचा की देखभाल न करना।
  • और ये सारी समस्याएं त्वचा की सुंदरता को नष्ट करती है। त्वचा के ऊपरी सतह पर दाग -धब्बे आने से त्वचा का रंग बदरंग होने लगता है। हमारे त्वचा के भीतरी सतह में होने वाले तैलीय ग्रंथिया होती है जो असंतुलित कार्य त्वचा की नमी और रंग देने वाले सैलो का को बंद कर देती है। ये लम्बे समय तक त्वचा की देखभाल न करने का ही नतीजा होता है।

कई रूपों से ये समस्याएं होती है  जैसे – 

1 . त्वचा के भीतरी भागो में नमी की कमी उत्त्पन्न हो जाना।
2 .  तैलीय ग्रंथि के असंतुलित कार्य की वजह से।
3 . त्वचा की भीतरी सतह में नई कोशिकाएं के निर्माण में कमी आने से (cell reformation) .
4 त्वचा में रंग देने वाले कोशिकाओं में विकृति उत्त्पन्न होने के कारण। जब त्वचा में एक समस्या होती है तो शीघ्र ही त्वचा में कई जगह प्रभावित भी होती है  हमे  त्वचा की देखभाल करने से पहले -त्वचा की संरचना के बारे में जानना भी बहुत ज़रूरी है।
हमारे शरीर में त्वचा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग होता है और साथ ही साथ त्वचा एक बहुत बढ़ा अंग भी होता है। एक सामान्य इंसान के शरीर को ढके रहने वाली त्वचा का क्षेत्रफल लगभग 1 . 67 वर्ग मीटर होता है और इसकी लगभग 3 . 17  किलोग्राम का होता है। त्वचा की मोटाई शरीर के अलग अलग जगहों पर अलग अलग होती है।  जिसकी सबसे कम मोटाई आखो की पलकों की होती है। और सबसे अधिक मोटाई पैरो के तलवो में होती है। त्वचा हमारे शरीर के अंदर जाने वाले जीवाणुओं को रोकती है।  ऐसे जीवाणु बहुत ही कम है ,जो त्वचा के अंदर जा सके।
त्वचा में बहुत अधिक मात्रा में तंत्रिकाएं पाई जाती है  तंत्रिकाओं की अधिक मात्रा के करण त्वचा को वातावरण में होने वाले सभी परिवर्तन का आभास हो जाता है। यही कारण है की ठण्ड के मौसम में शरीर के बाल खड़े हो जाते है।  इन बालो के बीच में ठंडी हवा एकत्र हो जाती है जो हमारे शरीर के गर्मी को बहार जाने से रोकती है। कभी कभी डर के कारण भी बाल खड़े हो जाते है। जो शरीर की ऊर्जा को बहार निकलने से रोकते है।

त्वचा में कई प्रकार के ग्रंथिया पाई जाती है। दो प्रकार के ग्रंथिया विशेष रूप से पाए जाते है।  — 

 स्वेद ग्रंथिया (पसीने की ग्रंथिया) और त्वग्वसीय ग्रंथिया (तैलीय ग्रंथिया) . जब भी मौसम में बदलाव होते है तो स्वेद ग्रंथिया अपना कार्य शुरू कर देती है। यह स्वेद (पसीना) वाष्प बनकर उड़ता है।
पसीने निकलने की क्रिया में शरीर से ऊर्जा ग्रहण की जाती है। और शरीर का तापमान सामन्य बना रहता है यही कारण है की गर्मी के मौसम में शरीर से काफी पसीना निकलता है। जबकी ठण्ड की मौसम में पसीना नहीं निकलता है। पसीने के निकलने के कई कारण भी हो सकते है। इसमें स्वचालित तंत्रिका तंत्र का प्रभाव भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।
पर कभी कभी बहुत अधिक मात्रा में हथेलिओ  पर पसीना आता है। जिससे हथेली हमेशा गीली बनी रहती है। जिसके कारण हमे परेशानी भी महशुस  होती है।

 (त्वग्वसीय ग्रंथिया)

दूसरा  —–  त्वग्वसीय ग्रंथिया त्वचा पर त्वग्वसा स्रवित करती है त्वग्वसा का प्रमुख कार्य त्वचा को नमी देना और चिकनाई देना होता है। इसका शरीर से बहार होना लौंगिक हॉर्मोन पर निर्भर करता है। ज़्यादा तर पुरुष लौंगिक हॉर्मोन इस कार्य के लिए ज़िम्मेदार होते है। त्वग्वसीय ग्रंथिया ज़्यादा तर चेहरे पर पाई जाती है। , यौवनावस्था में इन ग्रंथियों की कार्य क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
 पुरषो में यह कार्य क्षमता अधिक होती है। पर महिलाओ में ये कम होती है। कभी कभी त्वग्वसीय ग्रंथियो का मुँह किसी कारण बंद हो जाता है। , अतः  त्वग्वसीय ग्रंथि के अंदर एकत्र हो जाता है। और ग्रंथि फूल कर बढ़ी हो जाती है। इस दशा को मुहासे  कहा जाता है।

त्वचा दो स्तरों का बना होता है। —

बाह्य त्वचा या एपिडमिरस  और वास्तविक त्वचा या डर्मिस। डर्मिस की नीचे एक ढीली ढीली तह होती है। जिसे अध:त्वक कहते है। बाह्य त्वचा की मोटाई शरीर में अलग अलग होती है। जिन भागो में घर्षण अधिक होती है।वहा   इसकी मोटाई भी अधिक बढ़ जाती है। पैरो के तलवो में इसकी मोटाई बहुत अधिक होती है।

SKINCARE ऑइली स्किन से छुटकारा (treatment of oily skin) 

ध्यान दे —   यहाँ पर  दी गई जानकारी सिर्फ लोगो को अवगत करने के लिए है इसे मेडिकल सलाह के रूप में  ना लिया जाये। इस जानकारी को आप अपने से अपना इलाज के काम में ना ले। 
आपको अपनी हर बीमारी की सलाह और इलाज अपने डॉक्टर से ले। क्युकी हर इंसान की स्किन अलग अलग भी होती है। हमारी स्किन बहुत ऑयली क्यों हो जाती है ?
skin care tips
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नॉर्मली आयल स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है। स्किन को सॉफ्ट रखता है सूखने से बचता है और स्किन पर रैंकर्स भी नहीं आने देता है। लेकिन हद से ज़्यादा आयल स्किन के लिए भी ठीक नहीं होता है। एक्सेस आयल हवा से धूल मिटटी,धुवा पकड़ता है। पोर्स को ब्लॉक करता है। फंगस और बैक्टीरिया इन्फेक्शन्स को पनपने में भी मदत करता है। इसलिए जिन लोगो की स्किन बहुत ऑयली होती है। उन्हें अक्सर फेस पर फ़न्गल इंफेक्शन और पिम्पल्स हो जाते है।
skin care tips
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ऑयली स्किन के कारण — skin care tips

ऑयली स्किन की समस्या टीन ऐज में जब हमारी बॉडी में हॉर्मोन्स लेवॅल बहुत ही तेजी से बढ़ता है। बहुत होते है। कभी 20 से 30 उम्र तक चलती है। कई बार लोगो में किसी बीमारी के कारण बॉडी में हॉर्मोन्स अनबेलेंस हो जाता है। या फिर जिन लोगो को इसे कारण से हॉर्मोन्स ट्रीटमेंट लेना पड़ता है। उनकी स्किन बहुत ऑयली हो जाती है। इस कारण 40 -50 के उम्र में भी पिम्पल हो जाते है।

स्किन ऑयली हो जाये तो हमे क्या करना चाहिए  ?

अब अगर स्किन ऑयली हो रही है तो हमे क्या करना चाहिए। पहले तो फेस को बार बार स्टॉन्ग साबुन या मिडिकेटेड साबुन या फेस वॉश से नहीं धोना चाहिए हमेशा जेंटल सोप जैसे पीयर्स सोप(pears soap) या सीटाफिल (cetaphil lotion) जैसे नॉन सोप क्लेंजर से ही धोना चाहिए।  और अगर फिर भी आयल ज़्यादा आ रहा है तो सुबह आयल रिमूविंग फेस वॉश जैसे 2 %  सेलिसिलिक एसिड (salicylic acid) या 4 % बेनजोइल पेरोक्साइड (benzoyl peroxide) फेस वॉश से फेस को वॉश करना चाहिए।
फेस वॉश करने के लिए गर्म पानी इस्तेमाल करना चाहिए। इसके बाद एक आयल फ्री मॉशेराइजर ज़रूर लगाना चाहिए मॉशेराइजर हमारी स्किन को डिहाइड्रेशन और सूखने से बचता है। जब भी फेस को पोछे तब तौलिये से रगड़ना नहीं चाहिए।  ऑयली स्किन पहले से ही बहुत मुलायम होती है। और रगड़ने से छील जाती है। उसमे जलन होने लगता है और फिर उसमे आसानी से फंगल बैक्टीरियल इंफेक्शन भी लग जाते है।

ज़्यादा मेकअप स्किन के लिए अच्छा नहीं है— skin care tips 

skin care tips
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जिन लोगो की ऑयली स्किन हो उन्हें हेवी मेकअप नहीं लगाना चाहिए आयल और हेवी मेकअप से पोर्श ब्लॉक हो जाते है। और पिम्पल्स निकलने लगते है। अगर आप मेकअप करते है तो आपको हमेशा मेकअप कम से कम या लाइट और अच्छी क़्वालिटी का ही लगाना चाहिए। चिप मेकअप कई बार एस्बस्टोस (ASBESTOS) और मायका(MICA) जैसे तत्वों से बना होता है। जिससे पोर्श ब्लॉक हो जाते है। स्किन में इरिटेशन एलर्जी और पिम्पल्स भी हो जाते है। रात को सोने के पहले मेकअप को जेंटलसॉप  से धो के आयल फ्री मौशेराइजर लगाना न भूले।

ऑयली स्किन वालो को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। —-skin care tips

जिन लोगो की स्किन ऑयली है उन्हें मिल्क प्रोडक्ट्स जैसे – चीज़ ,पनीर दूध की बनी  मिठाईया वाइट शुगर ,कोलास ,रिफाइंड तेल में तले स्नेक्स कम खाना चाहिए।

ऑयली स्किन ट्रीटमेंट में नारियल के तेल की भूमिका —

बहुत लोग पूछते है की क्या वो नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते है अपने ऑयली स्किन में या नहीं है।  मेरा कहना है की हा yes नारियल का तेल हमारे स्किन में जो तेल बनता है ,उसमे बहुत समताये होती है।  इसलिए जब हम कोकोनट आयल या नारियल का तेल लगते है तो हमारी स्किन अपना ही बनाया हुआ तेल समझ कर तेल बनाना कम कर देती है।
 इसे धीरे धीरे स्किन का आयल बनना कम हो जाता है। और ये होने से पिम्पल्स भी कम हो जाते है।  जब आप कोकोनट आयल लगाना सुरु करे तो थोड़े दिनों तक आपको अपनी स्किन थोड़ी ऑयली लगेगी पर धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा।

ऑयली स्किन के लिए मास्क — skin care tips 

skin care tips
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 अब मैं आपको कुछ मास्क बताता हूँ। – जो ऑयली स्किन को मैनेज करने में मदत करेगा। ऐग वाईट और निम्बू के रस का मास्क

(egg white & lemon juice mask) 

एक ऐग वाईट (अंडे की सफेदी) को ले कर उसमे आधा चम्मच निम्बू का रस मिलाये और फिर अपने फेस पर लगा ले। आधे घंटे रहने दे फिर गर्म पानी से धो ले आयल भी कम हो जायेगा और स्किन भी आपकी टाइट हो जाएगी। दूसरा है – ताजी खीरे का मास्क (cucumber mask) खीरे के  पतले पतले स्काइस काट कर फेस पर लगाए और आधा घंटा रहने दे।
 या खीरे के एक टुकड़े को ले कर फेस पर अच्छी तरह से रगड़ ले और रात भर रहने दे सुबह पानी से मुँह धो कर उसपे मौसेराइजर लगा ले।   तीसरा है — ताजे टमाटर के रस का मास्क      (fresh tomato mask) ताजे टमाटर के रस को अपने फेस पर हलके हाथो से मसाज करे और टमाटर के रस को आधे घंटे तक रहने दे फिर गर्म पानी से धो ले ये मास्क आप रोज़ाना लगा सकते है।
दोस्तों आशा करता हूँ की मेरा ये पोस्ट आपको पसंद आया होगा मैं आगे भी आपके लिए ऐसे ही अच्छी -अच्छी जानकारियाँ लाता रहूँगा।  धन्यवाद। 
AMIThttp://healthkikahani.com
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