HomeHEALTH EDUCATIONmirgi | मिर्गी के लक्षण कारण एवं इलाज 2021

mirgi | मिर्गी के लक्षण कारण एवं इलाज 2021

मिर्गी के लक्षण क्या है? मिर्गी के कारण, और इलाज

mirgi – वैसे तो बहुत कम लोगो को मिर्गी होती है।

पर ये हमेशा अचानक ही आता है जिसकी खबर तक हमे नहीं हो पाती है। मिर्गी जिसे epilesy भी कहा जाता है। आज इसके बारे में विस्तार से जानेंगे।

wikipedia


 

मिर्गी क्या होता है? mirgi

EPILESY यानि मिर्गी ये एक सिम्टम्स नर्वस सिस्टम का न्यूरोलोजी डिसॉडर है

इसमें ब्रेन के एक खास हिस्से के एक्टिविटी में बदलाव आ जाता है।

जिसकी वजह से बेहोशी आती है, या कोई भी काम करने में परेशानी होती है, व्यवहार में बदलाव का आना, या झनझनाहट, इसे मेडिकली सीजर्स भी कहते है। मिर्गी आम तौर पर बहुत कम लोगो को होती है पर ये किसी भी इंसान को हो सकती है चाहे वो महिला हो पुरुष हो या कोई बच्चा और ये किसी भी उम्र वालो को हो सकती है। पर इसके लक्षण सभी लोगो में एक जैसे ही नहीं पाए जाते। किसी किसी में लक्षण अलग-अलग भी हो सकते है। कुछ लोग मिर्गी आने पर सिर्फ अपनी पलके झपकते है और अचेत हो जाते है। और शरीर अकड़ जाता है। पर किसी का मेडिकल टेस्ट किये बिना बताया नहीं जाए की ये मिर्गी ही है। इसके लिए मेडिकल टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है।

कभी कभी दवाइयों और सर्जरी से मिर्गी को कंट्रोल किया जा सकता है।

कुछ लोगो को हमेशा दवाइयों की ज़रूरत पड़ सकती है।

या अगर बच्चो में मिर्गी आती है।

तो जैसे-जैसे उनका उम्र बढ़ता जाता है वैसे वैसे mirgi की समस्या भी उनमे ख़त्म हो जाती है।


मिर्गी के लक्षण

mirgi
mirgi

यह रोग ब्रेन के अबनार्मल एक्टिविटी की वजह से होता है। इसलिए ब्रेन कंट्रोल करने की क्षंमता सभी लोगो में अलग – अलग होती है। और लोगो में इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते है जैसे –

1 – भ्रम का होना –

कुछ लोगो में बहुत सी चीज़ोको ले कर भ्रम होता है

बात करते समय कुछ भी बोलना,

देखने में कुछ चीज़े दो दो दिखाई देना या एक से ज़्यादा दिखाई देना,

2 – बोलने में परेशानी होना –

बात करते समय अटकना या बार बार एक ही बात को दोहराना।

3 – अंगो का तेज़ी से फड़कना –

शरीर के कई अंग होते है जो ज़्यादा ज़ोर से फड़कने लगते है या तो अकड़ जाते है। और सीधे नहीं होते।

4 – पैरो -और हाथो का अकड़ जाना –

जब भी मिर्गी आती है तो पैर और हाथ किसी लकड़ी की तरह ठोस हो जाते है और सीधे नहीं होते और जब तक नार्मल नहीं होते तब तक हाथ और पैर अकड़े ही रहते है।

5 – बेहोशी आना –

मिर्गी आने से ब्रेन को समझ नहीं आता की उसके साथ क्या हुवा है इसलिए कुछ देर के लिए ब्रेन अपने बहुत से कंट्रोल खो देता है जिसमे इंसान का होश में रहना भी शामिल है। इसलिए mirgi आने पर इंसान बेहोस हो जाता है।

6 – मुँह से झग आना – किसी किसी को मुँह से झाग भी आती है क्युकी इसका असर आपके (stomach पेट) पर भी पड़ता है।

7 – डर का लगना –

mirgi आने से पहले डर सा लगने लगता है जी मचलने लगता है और बहुत घबराहट होने लगती है।

8 – तनाव होने – तनाव या सर में दर्द होना हो सकता है।

mirgi आने के ये लक्षण हो सकते है। इसके अलावा सभी लोगो में अलग अलग लक्षण भी हो सकते है जैसा की हमने आपको पहले ही बताया था।


सीजर्स के प्रकार –

डॉक्टर्स सीजर्स को ब्रेन एक्टिविटी के शुरुवात के दो तरहों से देखते है।
1 – फोकल सीजर्स (focal seizures)
2 – सामान्यीकृत सीजर्स (generalized seizures)


तो अब जानते है फोकल सीजर्स (focal seizures) के बारे में

जब ब्रेन के एक हिस्से में एबनॉर्मल एक्टिविटी के कारण सीजर्स आये तो उसे सीजर्स या पार्शियल सीजर्स कहा जाता है। ये दो प्रकार के होते है (1) – सिंपल पार्शियल सीजर्स – इस प्रकार के सीजर्स में मरीज को बेहोशी नहीं आती है। सिर्फ उसे देखने सूंघने या बात करने या महशुस करने की क्षमता पर असर पड़ता है। इसके साथ ही हाथ और पैर में झनझनाहट या आँखों के आगे अँधेरा आने की शिकायत हो सकती है

(2) – कॉम्प्लेक्स पार्शियल सीजर्स – इस प्रकार के सीजर्स में मरीज को कुछ भी महशुस नहीं होता और मरीज अपने आस पास के मौहोल के साथ कोर्डिनेट नहीं कर पाता। और नार्मल व्यवहार भी हीं कर पाता, इसके अलावा मरीज की आंखे ऊपर की तरफ हो जाती है और आसमान की तरफ देखता रहता है। और अपने होठो को जबाता है। फोकल सीजर्स के लक्षण बहुत सी बीमारियों में जैसे – माइग्रेन,नाइकोलिप्सी,या अन्य मानसिक परेशानियों में भी हो सकते है। इसलिए टेस्ट के बाद ही ये पता लगाया जा सकता है की फोकल सीजर्स मिर्गी की वजह से है या किसी और मानसिक बीमारी की वजह से है।


अब जानते है सामान्यीकृत सीजर्स (generalized seizures) के बारे में – mirgi

इस प्रकार के सीजर्स में ब्रेन के सभी भाग शामिल होते है और ये 6 तरीके का होता है।

1 – एब्सेंस सीजर्स (absence seizures)-

ये ज़्यादा तर बच्चो को होता है। और इस प्रकार के सीजर्स में बार बार अपने पलकों को झपकना होठो को चबाना और बेहोश होने की समस्या आती है।

2 – टोनिक सीजर्स (tonic seizures) –

इस तरह से सीजर्स में शरीर के मसल्स पर असर ज़्यादा होता है इसलिए मरीज का अपने शरीर पर कोई कंट्रोल नहीं रहता है। जिससे मरीज अचानक ही गिर सकता है।

3 – एटोनिक सीजर्स (atonic seizures)-

इस सीजर्स को ड्राप सीजर्स भी कहा जाता है। क्युकी इसमें मरीज अपने शरीर पर कंट्रोल नहीं रख पाता है और गिर जाता है।

4 – क्लोनिक सीजर्स (clonic seizures) –

क्लोनिक सीजर्स का असर गले और चेहरे पर ज़्यादा पड़ता है।

5 – मायक्लोनिक सीजर्स (myoclonic seizures) –

इस प्रकार के सीजर्स में हाथो और पैरो में झटका लगता है और कभी कभी वो मुड़ भी जाते है।

6 – टोनिक क्लोनिक सीजर्स (tonic clonic seizures) –

ये सीजर्स में बहुत परेशानी आती है।

इसमें अचानक इंसान बेहोश हो कर गिर जाता है और शरीर पूरी तरह से अकड़ जाता है। इसके अलावा पेशाब का निकलना,आँखों का गुमना, जीभ काटना जैसे परेशानी आती है।

mirgi
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डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

(1) – जब भी मरीज को दौरा आये और 5 मिनट से ज़्यादा समय लग जाये नार्मल होने में।
(2) – आपको अच्छी तरह से ये देखना होगा की मरीज को साँस लेने में कोई परेशानी तो नहीं हो रही है अगर मरीज को साँस लेने में दिक्कत हो रही है तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
(3) – दौरा बार बार आये तो।
(4) – दौरे के बाद मरीज को बुखार आये तो।
(5) – अगर कोई महिला गर्भावस्था में हो तो जाना चाहिए डॉक्टर के पास।
(6) – अगर मरीज को डाइबिटीज है तो।
(7) – अगर मरीज खुद को चोट पहुँचाना चाह रहा हो तब।

और पढ़े – stomach in hindi पेट की समस्या से कैसे बचे


 

मिर्गी आने के क्या कारण है? mirgi

वैसे तो लोगो में मिर्गी का रोग क्यों होता है ये पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुवा है। पर ये माना जाता है की मानसिक कारणो या किसी असिडेन्ट से सर में चोट लगने से, ब्रेन स्टॉक, वाइरल इन्फ्लाइजेटिस,एट्स की वजह से हो सकता है। ब्रेन स्टॉक बड़ो में और बच्चो में गर्भावस्था में माँ का पोषक आहार और औक्सीजन की कमी का होने मिर्गी का एक कारण हो सकता है। बच्चो में मिर्गी डेवलपमेंट डिसऑर्डर के साथ जोड़ कर देखा जाता है और औटिज़म न्यूरो फाइब्रोसिस भी बच्चो में मिर्गी के कारण हो सकते है।


डायग्नोसिस कैसे किया जाता है।

सबसे पहले डॉक्टर्स लक्षणों के आधार पर कुछ टेस्ट करते है जिनमे – न्यूरोलॉजिकल टेस्ट – इस तरह से टेस्ट में डॉक्टर मरीज का व्यवहार मेन्टल टेस्ट कर के पता लगते है की किस प्रकार की मिर्गी की समस्या है। इसके बाद ब्लड टेस्ट के अनमानशिक कारणों से इंफेक्शन का पता करते है। जो सीजर्स का कारण भी हो सकते है। इसके अलावा इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राम (EEG) भी किया जाता है। ये टेस्ट मिर्गी की डायग्नोसिस में किया जाता है। इस टेस्ट में सर पर इलेक्ट्रोक चिपका कर ब्रेन की इलेक्ट्रॉनिक एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है, इसके अलावा डॉक्टर्स (CT SCAN) भी करते है या (MRI) भी करते है। इस टेस्ट में mri अधिक रेडियो वेव्स की सहायता से ब्रेन की सारी जानकारी मिल जाती है और एक डिटेल्स तस्वीर तैयार की जाती है। और ब्रेन की अबनॉर्मल एक्टिविटी का कारण पता चल जाता है।


इसके अलावा फंक्शनल मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (FMRI) भी की जाती है।

फंक्शनल mri की मदद से डॉक्टर ब्रेन के किसी भी हिस्से में खून के बहाओ का पता कर सकते है। इस टेस्ट को सर्जरी से पहले क्रिटिकल फंग्शन जैसे स्पीच और मुहमेन्ट को देखने के लिए किया जाता है। यह टेस्ट सर्जरी में किसी क्रिटिकल कंडीशन में इंजरी के नुकसान के लिए किया जाता है।


इसके अलावा पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी स्कैन (PET SCAN) –

pet scan में थोड़ा सा रेडियो एक्टिव पदार्थ मरीज की नसों में डाला जाता है।

और ब्रेन के एक्टिव अबनॉर्मल वजह की पहचान किया जाता है।

तो इस तरह से पता लगाया जाता है की मरीज को मिर्गी है न नहीं।

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